आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले…जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए.!!
बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा महोल्ला, जब से डिग्रियाँ समझ में आई, पाँव जलने लगे
तुझे जैसे चलना है वैसे चल ए ज़िंदगी मेरी… मैने तो तुझसे हर उम्मीद छोड रखी है.. !!!!
इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी, चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आ गया ।
ये मत कहो ख़ुदा से मेरी मुश्किले बड़ी हैं, ये मुश्किलों से कह दो मेरा ख़ुदा बड़ा है।।।।
बड़े ही अजब कायेदे हैं मेरे मुल्क के… यहाँ भूख से ज्यादा धर्म पर बेहस होती है॥
महान सपने देखने वालों के महान सपने हमेशा पूरे होते हैं
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की
आँख के बदले में आँख पूरे विश्व को अँधा बना देगी
गन्दगी में तो हम सभी हैं, पर कुछ ऐसे भी हैं जो केवल सितारों को ही देखते हैं।
मैं जिससे भी मिला हूँ, उससे प्रभावित हुआ हूँ
गलत कहते है लोग की सफेद रंग मै वफा होती है यारो,अगर ऐसा होता तो आज “नमक”, जख्मो की दवा होती!
सब पूछते है मुझसे मौहब्बत है क्या ? मुस्करा देता हूँ मैं और याद आ जाती है माँ॥
हमसे भुलाया ही नहीं जाता, एक मुखलिस का प्यार;लोग जिगर वाले हैं, जो रोज नया महबूब बना लेते हैं!”
अपून के गली मेँ संभाल के आना पगली ..! अगर पैर फिसल गया तो सिधे मोहोब्बत मेँ गिरेगी।
ना किसी से ईर्ष्या!..ना किसी से कोई होड़,मेरी अपनी मंजिलें,मेरी अपनी दौड़…
“क्या लिखूँ , अपनी जिंदगी के बारे में दोस्तों , वो लोग ही बिछड़ गए , जो जिंदगी हुआ करते थे” !!
कितना मुश्किल हे मोहबत की कहानी लिखना,जेसे पानी से पानी पर पानी लिखना ।
पगली तू बात करने का मौका तो दे, कसम से कहता हु, रूला देंगे तुझे तेरे ही सितम गिनाते गिनाते.
“लफ्ज् दिल से निकलते हैं दिमाग से तो मतलब निकलते है”
तू मांग तो सही अपनी दुआओ मे बददुआ मेरे लिए मै हंसकर खुदा से आमीन कह दूंगा!
जाता हुआ मौसम लौटकर आया है..काश वो भी कोशिश करके देखे…!!
अपनी मौत भी क्या मौत होगी, यू ही मर जायेंगे एक दिन तुम पर मरते-मरते !
हारने वालो का भी अपना रुतबा होता हैं …मलाल वो करे जो दौड़ में शामिल नही थे..
ये तेरा वहम है के हम तुम्हे भूल जायेगे..वो शहर तेरा होगा, जहाँ बेवफा लोग बसा करते है..
अन्धकार समस्या नही है, दीपक जलाने के हमारे प्रयासों का अभाव ही समस्या है ।
बेशक खूबसूरत तो वो आज भी है,लेकिन चेहरे पर वो मुस्कान नहीं,जो हम लाया करते थे…!
चलो माना तुम्हारी आदत हैं तडपाना, मगर जरा सोचो अगर कोई मर गया तो…
अगर “बेवफाओं” की अलग ही दुनिया होती तो मेरी वाली वहाँ की “रानी” होती..!!
इक महेबूब लापरवाह इक महोबत बेपनाह दोनो काफी हे सूकून बरबाद करने को!!
वो जो हमसे नफरत करते हैं,हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,नफरत है तो क्या हुआ यारो,कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं।
कोई इल्जाम रह गया हो तो वो भी दे दो.. पहले भी हम बुरे थे, अब थोड़े और सही…!!
तेरी दुआओ का दस्तुर भी अजब है मेरे मौला.. मुहबबत उन्ही को मिलती है जिन्हे निभानी नही आती..
जीवन मैं एक बार जो फैसला कर लो तो फिर पीछे मुड़कर मत देखना क्योंकि पलट कर देखने वाले इतिहास नहीं बनाते।
इंसान को बोलना सीखने में दो साल लग जाते हैं लेकिन, क्या बोलना है, यह सीखने में पूरी ज़िन्दगी निकल जाती है..
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